आपसी क्षमता, एकाग्रता आपको ऊंचाई की ओर ले जाता है – कुलपति
महासमुंद ट्रैक सीजी गौरव चंद्राकर
13 दिसंबर को उच्च शिक्षा संचालनालय एवं पं० रविशंकर शुक्ल वि.कि. रायपुर के पत्रानुसार, एवं संस्था के प्राचार्य प्रो श्रीमती करुणा दुबे के मागदर्शन से पुण्य श्लोक लोकमाता अहिल्या देवी जन्म त्रिशताब्दी वर्ष समारोह का आयोजन शासकीय महाप्रभु वल्लभाचार्य स्नातकोत्तर महाविद्यालय महासमुंद के स्वामी विवेकानंद सभागार में किया गया। इस पुण्य अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में माननीय प्रो सच्चिदानंद शुक्ला जी, कुल पति – पंडित रविशंकर शुक्ल वि०वि० रायपुर की गरिमामयी उपस्थिति रही। मुख्य वक्ता माननीय डॉ. टोपलाल वर्मा जी प्रांत संघचालक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, छत्तीसगढ़ प्रांत आमंत्रित थे। कार्यक्रम का संयोजन – डॉ. दुर्गावती भारतीय विभागाध्यक्ष हिंदी द्वारा किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि के द्वारा माता सरस्वती के तैल चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्जवलन कर किया गया । तत्पश्चात अतिथि स्वागत एवं अतिथि परिचय परंपरा का सुंदर निर्वाह किया गया । अतिथियों का स्वागत करते हुए प्राचार्य करुणा दुबे ने कहा कि लोकमाता अहिल्यादेवी का पुण्य स्मरण कर महाविद्यालय परिवार गौरवान्वित है । मुख्य अतिथि के रूप कुलपति महोदय एवं मुख्य वक्ता के रूप में डॉ टोपलाल वर्मा जी के सानिध्य से पूरा परिसर सकारात्मक उर्जा से भर उठा है। निश्चित रूप लोकमाता के महान गुण का श्रवणकर छात्र छात्राएं समृद्ध हुए हैं। मुख्य अतिथि प्रो. सच्चिदानंद शुक्ला जी ने विद्यार्थियों को इस कार्यक्रम में उपस्थित होने पर शुभकामनाएं प्रेषित करते हुए कहा कि समाज की मजबूती के लिए महिलाओं को भूमिका महत्वपूर्ण होती है । गौरवमयी भारतभूमि के परंपरा व मूल्य पूरे विश्व में प्रसिद्ध है । माता अहिल्या बाई हमारी भारतीय परम्परा की समृद्धता की जीवंत उदाहरण है । अहिल्याबाई ने जीवनपथ के कठिनाइयों में भी प्रजा के विकास के लिए मजबूती से खड़ी रही । उन्होंने आगे कहा कि अहिल्या बाई के जीवन से प्रेरणा लेकर युवा वर्ग अपने क्षमता और लगन से भारत भूमि को ऊंचाई की ओर ले जा सकता है ।

मुख्य वक्ता डॉ. टोपलाल वर्मा जी के अपने व्याख्यान में कहा कि अहिल्याबाई होल्कर के कार्य को जन जन तक पहुंचाना है । उनके कुशल प्रशासन, सामाजिक दायित्व, न्याय प्रियता एवं पर्यावरण संरक्षण का कार्य अनुकरणीय है । अहिल्याबाई ने 15 वर्ष की उम्र में राज काज संभाल ली। उनके संरक्षण में मालवा दिन प्रतिदिन प्रगति कर रहा था और प्रजा भी खुश थी । युद्ध कौशल में निपुण माता अहिल्या ने अस्त्र शस्त्र के अभाव में अपने सैनिकों को अस्त्र शस्त्र बनाने का प्रशिक्षण दिया और समृद्ध शस्त्रागार का निर्माण कराया, मालवा के हर संकट को हमेशा रानी ने अपना संकट मानी।शिव की महान उपासिका अहिल्या देवी ने अपने हस्ताक्षर के जगह श्री शंकर लिखती थी । उन्होंने स्त्री शिक्षा पर कार्य किया और शोध कार्य प्रारंभ किया । उन्होंने अपने कार्यकाल में काशी से कटक तक रोड बनवाया । एकमात्र महिला जिसे पुण्यश्लोक की उपाधि दी गई। उन्होंने सबसे पहले दत्तक पुत्र प्रथा प्रारंभ किया और उसके बाद पुनर्विवाह प्रथा का भी आरंभ किया । इस प्रकार से लोकमाता अहिल्या बाई होल्कर का योगदान स्मरणीय है । लोकमाता अहिल्या बाई पर छात्र छात्राओं द्वारा निबंध लेखन भी किया गया जिसमें प्रथम एकता साहू बीएससी प्रथम सेमेस्टर द्वितीय स्थान डिम्पल जोगी एम ए अंग्रेजी रही विजेता छात्राओं को मंचस्थ अतिथियों के हाथों पुरस्कृत किया गया । मंचस्थ अतिथियों को प्रतीक चिन्ह भेंट किया गया । इस अवसर पर श्री महेश चंद्राकर जी, उमेश भारतीय गोस्वामी जी, सुश्री प्रभा थीटे जी , श्रीमती वाणी तिवारी जनभागीदारी सदस्य, एलुमनी सदस्य श्री महेश मक्कड़ जी, श्री घनश्याम सोनी जी, कला संकाय अध्यक्ष डॉ० रीता पांडेय, विज्ञान संकाय अध्यक्ष डॉ० ई०पी. चेलक, वाणिज्य संकाय अध्यक्ष प्रो. अजय कुमार राज, डॉ. नीलम अग्रवाल नैक समन्वयक, प्रो मनीराम धीवर आईक्यूएसी समन्वयक, प्रो० सी. खलको अंग्रेजी विभागाध्यक्ष, श्री प्रदीप कन्हेर विभागाध्यक्ष रसायनशास्त्र, दिलीप बढ़ई विभागाध्यक्ष समाजशास्त्र, श्री सूरज राम रात्रे ग्रंथपाल, श्री मुकेश साहू कार्यालय प्रमुख, श्री मनोज शर्मा, सहित महाविद्यालय के समस्त संकाय के सहायक प्रदायक, अतिथि सहायक प्राध्यापक, जनभागीदारी व्याख्याता, कर्मचारी एवं छात्र – छात्राएं उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन श्रीमती राजेश्वरी सोनी ने किया एवं आभार ज्ञापन डॉ. दुर्गावती भारतीय द्वारा किया गया ।
